✍प्रकृति की पुकार✍

✍प्रकृति की पुकार✍
  
 धरती ने कहा , मुझे बचा लो
मेरे वस्त्र छीनकर , शर्मिंदा ना करो ।

कुछ वृक्ष लगाकर , मेरी इज्जत बचा लो ।
मेरी पीठ पर छेद कर , घायल  ना करो ।

कुछ जल बचाकर , मुझे मलहम लगा दो ।
माँ की हत्या कर , मुँह छुपाया ना करो ।

गाय पालकर , मुझे अमृतदूध पिला दो ।
धर्म की बात कर , अमीर ना बनो ।

धर्म पे चलकर , मेरा अर्थ समझा दो ।
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